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NCDC Report : दिल के रोगियों के लिए ज्यादा गर्मी जानलेवा

संपादकीय टीम 23 मई 2024 को 08:45 am बजे
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NCDC Report : पसीना रक्तचाप और ह्दय गति को बढ़ाता है

NCDC Report : HEART PATEINTS की मौत के मामले 2.6 फीसदी तक बढ़ सकते हैं

NCDC Report : नई दिल्ली : राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) (National Centre for Disease Control, NCDC) ने बढ़ती गर्मी के मद्देनज़र केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी है। इस NCDC Report के अनुसार, अगर तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस लगातार बना रहता है तो यह हृदय रोगियों की जान ले सकता है। HEART PATEINTS की मौत के मामले 2.6 फीसदी तक बढ़ सकते हैं। शुगर के मरीजों के लिए तो खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।

पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचते ही दिल और दिमाग के अलावा आंत, किडनी, फेफड़ों, लिवर और पैंक्रियाज की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं। मानव शरीर का सामान्य तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस से 37.2 डिग्री के बीच होता है, लेकिन जब बाहरी तापमान इससे ज्यादा होता है तो सेहत पर संकट पैदा होने लगता है। हालांकि, बड़ों की तुलना में बच्चों पर इसका प्रभाव कम होता है।

NCDC Report : भीषण गर्मी से इन्सानों को 27 तरह के नुकसान की पहचान की गई है। ये पहचान राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम (एनपीसीसीएचएच) ने की है। इस NCDC Report के बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, अभी तक गर्मी की वजह से चक्कर आना, बेहोशी या फिर आंखों में जलन महसूस करने जैसी परेशानियों के बारे में जानते आये हैं। किस तापमान में शरीर का कौन सा अंग सबसे पहले प्रभावित हो सकता है इसके बारे में तथ्यों पर आधारित सूचना एकत्रित करने के उद्देश्य से यह रिपोर्ट सामने आई है, जिसे जल्द ही राज्यों के साथ साझा किया जाएगा।

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अत्यधिक गर्मी के कारण किसी व्यक्ति के अस्पताल में भर्ती होने का खतरा बढ़ने वाली अन्य स्थितियां गुर्दे की विफलता, पथरी और मूत्र पथ संक्रमण हैं। गर्मी की वजह से यह भी संभव है कि संक्रमण से लड़ने के लिए रक्त में निकलने वाले रसायन पूरे शरीर में सूजन पैदा कर दें।

ये symptoms हैं तो तुरंत मिलें डॉक्टर से

चिड़चिड़ापन बढ़ गया है, दौरा या कोमा आ रहा है, लाल या शुष्क त्वचा, बहुत तेज सिरदर्द, चक्कर या बेहोशी, मांसपेशियों में ऐंठन, उल्टी और दिल की तेज धड़कन ऐसे संकेत हैं, जिनमें तत्काल इलाज की जरूरत पड़ सकती है। रिपोर्ट में 10 साल तक के बच्चों को लेकर भी इस तरह के संकेतों के बारे में बताया है, जिनमें भोजन से इन्कार, पेशाब न आना, आंखों में सूजन या लालपन, सुस्ती, दौरे शामिल हैं। ऐसा कोई भी symptom दिखे तो तुरंत डॉक्टर को बताएं।

किनको है ज्यादा खतरा -महिला या पुरुष को

एनवायरनमेंट हेल्थ पर्सपेक्टिव जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में स्पेन के शोधकर्ताओं ने स्वीकारा है कि जब सबसे ज्यादा तापमान रहता है तो शुगर और रक्तचाप के मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराने का जोखिम दोगुना हो जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि बाहरी तापमान जब शरीर के तापमान की तुलना में अधिक होता है तो पसीना आने लगता है। यह सीधे तौर पर रक्तचाप और ह्दय गति को बढ़ाता है। गर्म दिनों में पुरुषों में चोटों के कारण अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम अधिक होता है, जबकि महिलाओं में संक्रामक, हार्मोनल व पाचन सम्बन्धी, सांस लेना या मूत्र रोगों के कारण अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम ज्यादा होता है।

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जानें कैसे पहुंचाती है गर्मी शरीर को नुकसान

सबसे पहले गर्मी का असर मानव के दिमाग पर पड़ता है। इसलिए 27 तरीकों में पहला स्थान दिमाग को दिया है जो सीधे तौर पर गर्मी की चपेट में आने पर स्ट्रोक या फिर हीट स्ट्रेस देता है। इसके बाद दूसरे स्थान पर हृदय, फिर आंत, किडनी, लिवर और पैंक्रियाज पर असर पड़ता है। जब शरीर का तापमान कोशिका की थर्मल सहनशीलता से अधिक होने लगता है तो ऐसी स्थिति को हीट साइटोटॉक्सिसिटी माना जाता है, जिसकी वजह से पैंक्रियाज को छोड़कर बाकी सभी छह अंगों को नुकसान होने लगता है। ऐसी स्थिति में मरीज की मृत्यु की आशंका बढ़ जाती है। इसी तरह जब तापमान बढ़ने के कारण रक्तचाप बढ़ता है तो पैंक्रियाज पर इसका असर होता है जो शुगर का स्तर बढ़ा देता है।

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https://telescopetimes.com/category/trending-news/national-news

https://www.livemint.com/news/india/ncdc-conducting-pan-india-surveillance-as-extreme-heat-conditions-grip-country-11714574365917.html

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