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Krishan Janamashthmi पर क्या दान करें कि भाग्य उदय हो

संपादकीय टीम 16 अगस्त 2025 को 02:22 pm बजे
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Krishan Janamashthmi : इन जातकों के लिए रहेगा शुभ

Krishan Janamashthm : पूजा का शुभ मुहूर्त और अन्य चीजों के बारे में जानिए विस्तार के साथ

जालंधर। Krishan Janamashthmi : इस बार की जन्म अष्टमी कई तरीकों से खास है। इस साल जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि लग ही नहीं रही है, फिर भी 16 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जा रही है। ऐसे में क्या 16 अगस्त को जन्माष्टमी का व्रत किया जाना शास्त्र सम्मत होगा। पूजा का शुभ मुहूर्त और अन्य चीजों के बारे में जानिए सबकुछ विस्तार के साथ :

यह त्यौहार भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है, जब भगवान विष्णु ने अपने आठवें अवतार के रूप में श्रीकृष्ण के रूप में मथुरा नगरी में देवकी और वासुदेव के घर जन्म लिया था।

यह दिन मुरली मनोहर श्रीकृष्ण की पूजा के लिए बहुत खास और शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ देवकी नंदन श्रीकृष्ण की पूजा करने और व्रत रखने से मन की हर इच्छा पूरी होती है और कष्ट मिट जाते हैं।

जन्माष्टमी का व्रत और पूजन दो तरह का होता है। एक श्रीकृष्ण जन्म व्रत और दूसरा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव व्रत जिसे नंदोत्सव व्रत भी कहते हैं। दरअसल भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसे निशीथ काल भी कहते हैं।

नंदगांव में श्रीकृष्ण के आगमन का उत्सव जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया गया

Krishan Janamashthmi 2025

हर साल जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले और श्रीकृष्णजन्म का व्रत रखने वाले लोग उस दिन जन्माष्टमी का व्रत रखते हैं जिस दिन मध्यरात्रि में भाद्रमास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि लगती है। और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद वसुदेवजी उनको नंदगांव लेकर चले गए तो नंदगांव में श्रीकृष्ण के आगमन का उत्सव जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया गया।

अष्टमी तिथि 15 अगस्त की मध्यरात्रि 1 बजकर 6 मिनट से शुरू है। ऐसे में 15 को निशीथ काल बीत जाने पर जन्माष्टमी तिथि लगेगी। 16 अगस्त रात 10 बजकर 36 मिनट तक ही भाद्र कृष्ण अष्टमी यानी जन्माष्टमी तिथि रहेगी। ऐसे में पेंच यह है कि 15 और 16 अगस्त दोनों ही दिन मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि नहीं होने की वजह से अष्टमी वृद्धा नवमी तिथि को शास्त्रमत से जन्माष्टमी व्रत के लिए ग्रहण किया गया है।

दूसरी तरफ 16 अगस्त को चंद्रोदय व्यापिनी अष्टमी तिथि रहेगी जिससे रात में 11 : 36 मिनट से 12 : 56 मिनट के बीच निशीथ काल में चंद्रदर्शन के साथ जन्माष्टमी का व्रत पूजन उत्तम होगा।

मेष, कर्क, तुला राशि के जातकों के लिए यह अष्टमी बहुत शुभ है। धार्मिक मान्यता है कि यदि इस दिन व्यक्ति अपनी राशि के अनुसार दान करे तो उसे विशेष पुण्य और भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है।

Krishan Janamashthmi : WHAT TO DONATE ON THIS VERY AUSPICIOUS DAY

Krishan Janamashthmi : WHAT TO DONATE ON THIS VERY AUSPICIOUS DAY

मेष राशि वाले गाय को दाने और दूध दे सकते हैं।

वृषभ राशि के लिए चावल, गुड़ या धनुष जैसे वस्तुओं का दान ठीक रहेगा।

मिथुन वाले तुलसी का पौधा लगा सकते हैं। तुलसी के पत्ते दान करना भी सही रहेगा।

कर्क राशि वाले विष्णु की पूजा के साथ पीले वस्त्र या वस्तुएं दान करें।

सिंह राशि के लिए पीले रंग के वस्त्र दान करना शुभ है।

कन्या राशि वाले तुलसी की माला या धार्मिक पुस्तकों का दान करें।

तुला राशि के लिए गीता या अन्य धार्मिक ग्रंथों का दान लाभकारी होता है।

वृश्चिक राशि जलपान सामग्री या तिल बाँट सकते हैं।

धनु राशि वाले गरीबों को या जरूररतमन्दों को कंबल या गर्म वस्त्र दान करें।

मकर वालों के लिए अनाज का दान उत्तम माना जाता है।

कुंभ राशि वाले पौधे लगाएं या बीज दान करें।

मीन राशि वाले दूध से बने उत्पाद और फल का दान दें।