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JALANDHAR का संसारपुर गांव — हॉकी का गढ़

संपादकीय टीम 9 जुलाई 2025 को 04:49 pm बजे
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JALANDHAR : "जहां हॉकी खून में है — एक गांव की खेल गाथा"

जालंधर 9 जुलाई (Mehak) : पंजाब का संसारपुर गांव (जालंधर जिला) भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया का इकलौता गांव माना जाता है जिसने 14 से ज्यादा ओलंपिक और इंटरनेशनल हॉकी खिलाड़ी दिए हैं। जो संसारपुर से निकले और भारत (या दूसरे देशों) का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। विश्व में ऐसा कोई और गांव नहीं जिसने इतने अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी दिए हों।

प्रमुख खिलाड़ी जो संसारपुर से निकले: खिलाड़ी का नाम, ओलंपिक वर्ष और उपलब्धि

1. सरदार हरबेल सिंह – ओलंपियन (1932 लॉस एंजेलेस

2. सरदार गुरदेव सिंह गिल – ओलंपियन (1952 हेलसिंकी, गोल्ड)

3. सरदार तरलोचन सिंह – ओलंपियन (1956 मेलबर्न, गोल्ड)

4. गुरबख्श सिंह – ओलंपियन (1964 टोक्यो, गोल्ड; भारत के कप्तान भी रहे)

5. बलबीर सिंह (जूनियर) – ओलंपियन (1968 मैक्सिको सिटी)

6. जगजीत सिंह – ओलंपियन (1964)

7. गुरमेल सिंह – ओलंपियन (1980 मॉस्को, गोल्ड मेडलिस्ट)

8. गुरचरण सिंह – भारतीय टीम के लिए खेले, एशियाई खेलों में भागीदारी

9. हरमिंदर सिंह – भारतीय राष्ट्रीय टीम खिलाड़ी

10. हरिंदर सिंह – भारतीय हॉकी टीम खिलाड़ी

11. बलविंदर सिंह – भारत के लिए इंटरनेशनल हॉकी

12. मनदीप सिंह – भारत U21 और सीनियर टीम में शामिल

13. गुरमिंदर सिंह – इंटरनेशनल प्लेयर

14. हरजिंदर सिंह – भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके खिलाड़ी

बलबीर सिंह सीनियर 1948-56 (यद्यपि वह संसारपुर से नहीं थे, लेकिन एक समय पर वहीं अभ्यास करते थे)
कुल मिलाकर, 150 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी इस गांव से निकले हैं। कई खिलाड़ियों ने केन्या, कनाडा और इंग्लैंड के लिए भी हॉकी खेली।

संस्कृति और खेल परंपरा लगभग हर घर में एक हॉकी खिलाड़ी बचपन से ही हॉकी सिखाई जाती है । पुराने खिलाड़ी नए खिलाड़ियों को कोचिंग देते हैं। स्कूल स्तर पर हॉकी को प्राथमिकता देते हैं।

JALANDHAR : कहां से शुरू हुई हॉकी की परंपरा

संसारपुर में हॉकी का इतिहास 20वीं सदी की शुरुआत से जुड़ा है। ब्रिटिश राज के दौरान पंजाब में सेना की भर्तियां होती थीं। संसारपुर के युवक बड़ी संख्या में सेना में भर्ती हुए और वहां उन्होंने हॉकी सीखी। जब वे छुट्टी में गांव लौटे, तो वे साथ में हॉकी भी लेकर आए — यहीं से गांव में हॉकी की नींव पड़ी ,धीरे-धीरे हॉकी गांव की पहचान बन गई।
हर घर में स्टिक दिखती थी, बच्चे स्कूल से पहले या बाद में मैदान में दिखते थे, और युवाओं का सपना ओलंपिक तक पहुंचने का होता था।

गौरव: उपलब्धियां जो संसारपुर को खास बनाती हैं

भारत को ओलंपिक स्तर के 14 से ज्यादा खिलाड़ी देने वाला संसारपुर दुनिया का एकमात्र गांव है। 100+ राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी संसारपुर ने भारत के अलावा केन्या, कनाडा, इंग्लैंड जैसी विदेशी टीमों को भी खिलाड़ी दिए हैं। हर घर से हॉकी खिलाड़ी गांव में करीब हर तीसरे घर से एक पेशेवर हॉकी खिलाड़ी निकला है।

JALANDHAR : पदक विजेता खिलाड़ी

इस गांव के कई खिलाड़ी गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल भारत के लिए जीत चुके हैं —
खासकर 1952, 1956, 1964, और 1980 के ओलंपिक्स में।

अब की स्थिति (चुनौतियां):

बात करें अब कि तो पहले जहां गांव में एक नहीं, कई मैदान होते थे, आज मैदान बंजर हो चुके हैं।
आधुनिक सुविधाओं की कमी, बेरोज़गारी और विदेश जाने का झुकाव के कारण हॉकी का जुनून अब धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
फिर भी कुछ पूर्व खिलाड़ी और NGOs मिलकर युवाओं को दोबारा हॉकी की राह पर ला रहे हैं।

फिर से उम्मीदें जगी हैं

बताया जा रहा हैं कि सरकार ने संसारपुर को फिर से हॉकी सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है।
खेलो इंडिया योजना के अंतर्गत हॉकी मैदानों के नवीनीकरण और ट्रेनिंग कैम्प्स शुरू करने की बात की जा रही है।