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HIGH COURT-पढ़ी लिखी पत्नी घर बेकार बैठ कर गुजारा भत्ता नहीं मांग सकती

संपादकीय टीम 12 फ़रवरी 2025 को 08:54 am बजे
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HIGH COURT-सिर्फ पति को तंग करने के लिए गुजारा भत्ता मांग रही है तो सही नहीं

HIGH COURT-रखरखाव राशि को 8,000 से घटाकर 5,000 रु प्रति माह किया

HIGH COURT-उच्च योग्यता होने के बावजूद काम नहीं करने की मंशा गलत

चंडीगढ़ /जालंधर। HIGH COURT-अगर अगली बार कोई पढ़ी लिखी महिला सिर्फ पति को तंग करने के लिए गुजारा भत्ता मांग रही है तो वो सही नहीं है। इस पर कोर्ट विचार करेगी कि मेंटेनेंस दिया जाये या नहीं। इसके अलावा शिक्षित महिला बेकार बैठ कर खर्चा नहीं मांग सकती। वो अगर नौकरी कर सकती है तो ज़रूर करे। हाई कोर्ट ने भरण पोषण देने का दावा करने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा।

हाई कोर्ट ने कहा कि धारा 125 उन महिलाओं के लिए राहत का काम है जो किसी कारणवश रोटी नहीं कमा सकती या फिर जिनको पति के कमाई की ज़रूरत है।

विस्तृत जानकारी के अनुसार उड़ीसा हाई कोर्ट का कहना है कि शिक्षित पत्नी बेकार नहीं रह सकती और भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती

HIGH COURT GAVE IMPORTANT DECISION

उपयुक्त और अच्छी लाभकारी नौकरी में अनुभव के साथ एक अच्छी तरह से शिक्षित पत्नी अपने पति से रखरखाव का दावा करने के लिए पूरी तरह से निष्क्रिय नहीं रह सकती है, उड़ीसा एचसी ने तलाक के मामले में पारिवारिक अदालत द्वारा आदेशित रखरखाव राशि को 8,000 रुपये से घटाकर 5,000 रुपये प्रति माह कर दिया है।

न्यायमूर्ति गौरीशंकर सतपथी ने कहा, "कानून कभी भी उन पत्नियों की सराहना नहीं करता है जो उचित और उच्च योग्यता होने के बावजूद काम नहीं करने या काम करने का प्रयास नहीं करके केवल पति पर गुजारा भत्ता देने की जिम्मेदारी डालने के लिए निष्क्रिय रहती हैं।" खाली बैठ कर ऐसी मांग करना गलत है।

उन्होंने कहा, "सीआरपीसी की धारा 125 को लागू करने में विधायिका का इरादा और उद्देश्य उन पत्नियों को राहत प्रदान करना था जो अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ हैं और उनके पास अपने भरण-पोषण के लिए पर्याप्त आय नहीं है।"

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