Ranveer Allahbadia शालीनता की शर्त पर "द रणवीर शो" चला सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट
Ranveer Allahbadia की इस दलील पर गौर, पॉडकास्ट ही आजीविका का एकमात्र स्रोत
Ranveer Allahbadia को अपने शो में मामले से संबंधित कुछ भी बोलने से रोका
नई दिल्ली। Ranveer Allahbadia : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पॉडकास्टर रणवीर इलाहाबदिया को "नैतिकता और शालीनता" बनाए रखने की शर्त पर "द रणवीर शो" प्रसारित करने की अनुमति दे दी। हालाँकि साथ ही यह भी कहा की कि वो शपथ पत्र देंगे कि उनका यह शो हर उम्र के लोगों के लिए उपयुक्त है।
जस्टिस सूर्यकांत और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इलाहाबदिया की इस दलील पर गौर किया कि पॉडकास्ट ही उनकी आजीविका का एकमात्र स्रोत है और उनके द्वारा नियोजित करीब 280 लोग इस शो पर निर्भर हैं।
पीठ ने इलाहाबदिया को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम सुरक्षा को अगले आदेश तक बढ़ा दिया और उन्हें गुवाहाटी में जांच में शामिल होने को कहा।
केंद्र और महाराष्ट्र, असम और ओडिशा जैसे राज्यों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि विवादास्पद यूट्यूब शो "इंडियाज गॉट लेटेंट" पर की गई टिप्पणियां न केवल अश्लील थीं बल्कि विकृत थीं और उन्होंने अदालत से किसी भी शो को प्रसारित न करने की शर्त में बदलाव न करने का आग्रह किया।
पीठ ने इलाहाबादिया का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिनव चंद्रचूड़ से कहा कि मौलिक अधिकार थाली में परोसे नहीं जाते और कुछ प्रतिबंध भी साथ लेकर आते हैं।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने बताया कि मामले में एक आरोपी कनाडा गया था और उसने मामले पर बात की थी।
न्यायाधीश ने चेतावनी देते हुए कहा, "ये युवा सोच सकते हैं कि हम पुराने हो गए हैं, लेकिन हम जानते हैं कि उनसे कैसे निपटना है। अदालत को हल्के में न लें।"
Ranveer Allahbadia
इसके बाद पीठ ने Ranveer Allahbadia को अपने शो में मामले से संबंधित कुछ भी बोलने से रोक दिया।
इस बीच केंद्र को सोशल मीडिया सामग्री पर एक मसौदा नियामक तंत्र के साथ आने का निर्देश दिया गया, जिसे सभी हितधारकों से सुझाव एकत्र करने के अलावा सार्वजनिक डोमेन में रखा जाना चाहिए।
हालांकि, पीठ ने उन्हें फिलहाल विदेश जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया और कहा कि मामले की जांच में शामिल होने के बाद उनकी प्रार्थना पर विचार किया जाएगा।
बीयरबाइसेप्स के नाम से मशहूर इलाहाबदिया के खिलाफ कॉमेडियन समय रैना के शो "इंडियाज गॉट लैटेंट" में माता-पिता और सेक्स पर की गई टिप्पणी के लिए कई एफआईआर दर्ज की गई थीं।
18 फरवरी को शीर्ष अदालत ने इलाहाबदिया को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान करते हुए उनकी टिप्पणियों को "अश्लील" बताया था और कहा कि उनका "गंदा दिमाग" है जो समाज को शर्मसार करता है।
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